25 December, 2012

बल्लेवादी क्रिकेट

इशांत शर्मा की एक  उठती और बाहर जाती बॉल को नो बॉल दिया गया जिस पर दामाद जी आउट थे | नियम के अनुसार तो वे आउट थे पर यह नियम बल्लेवादी है | जिस तरह हमारे यहाँ पितृसत्तात्मक समाज है और अधिकतर नियम कानून उसकी सत्ता को बचाए रखने के लिये है उसी तरह क्रिकेट में भी सारे नियम कानून बल्लेबाजों के हित में है | क्रिकेट नाम के खेल की शुरुआत ही मालिक और गुलाम के बीच हुआ | मालिक का काम बेटिंग करना था  और गुलामों का काम गेंद फेंकना और गेंद बिछना |  मालिक ( बल्लेबाजों ) को गेंद पीटने में कोई असुविधा ना हो  इस कारण नियम उसी के अनुसार बना दिये गये | पहले पिच पर कवर नहीं लगाये जाते थे ,हेलमेट नहीं था ,मेडिकल की तुरंत फुरंत सविधा नहीं थी ,  वीडियो  तकनीक का सहयोग नहीं था और गेंदबाज बिना मिलावट का खाना खा कर जी जान से बॉल फेंकता था | तब के लिये तो मान लिया कि नियम को बल्लेबाजों के हित में  जरुरी था पर अब डर काहे का | आज तो IPL खेल कर उनको ऐसा चस्का लग गया है कि धुनिया कि तरह गोलंदाजों को धोया जा रहा है | जिस गेंद पर मलिक को आउट नहीं दिया गया उस गेंद ने ऐसा कोई डर पैदा नहीं किया जिससे उन्हें शॉट खेलने में कोई दिक्कत हुई हो | ऐसे बॉल पर सचिन और सहवाग अपर कट करके छक्का मारते रहें हैं | होना यह चाहिए कि ऐसे गेंद को नो बॉल देना चाहिए जो वाकई बल्लेबाजों के शरीर को प्रभावित करे और उन्हें शॉट खेलने में दिक्कत पैदा करे |ICC को चाहिए कि वो पहल कर क्रिकेट को सिर्फ बेट्समैन का खेल बनने से रोकें ताकि खेल का रोमांच बना रहे | आज के मैच का यह निर्णायक बिंदु था ,अगर तब मलिक आउट होते तो अंतिम ओवर में 10 रन बनाना इतना आसान नहीं होता |

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