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| फाइटर कुंबले |
अनिल
कुंबले को भारतीय क्रिकेट टीम का नया कोच बनाया गया है।
उनको
रवि शास्त्री, संदीप पाटिल, वेंकटेश प्रसाद, प्रवीण आमरे, स्टुअर्ट ला जैसे 57 दिग्गजों पर वरीयता दी गयी है। कुंबले
को सबसे पहले एक चश्मिश गेंदबाज के रूप में हमने देखा था।
उसके
बाद जब उसने फिरोजशाह कोटला में पाकिस्तान के विरुद्ध टेस्ट क्रिकेट में पूरे 10 विकेट लिए तो बंदा हमारी नजर में आ
गया। पढाई-
लिखाई के चक्कर में हम वो मैच नहीं देख पाये थे लेकिन उस खबर को अच्छे से पढना
चाहते थे। एकमात्र उपाय था क्रिकेट सम्राट। मम्मी ने पैसे देने से इंकार कर दिया
और पापा से आज भी उम्मीद कम ही है। ममेरे भाई को कनविंस किया। उनको बताया कि अगर
ये वाला क्रिकेट सम्राट आपने नहीं खरीदा तो बहुत कुछ मिस कर देंगे आप। वो खुद
क्रिकेट के फैन थे।
प्रशांत
सिनेमा के सामने एक विविध समानों की दुकान थी, जिसमें
क्रिकेट सम्राट भी मिलती थी। ममेरा भाई पैसे वाला था उसने खरीद लिया मेरे कहने पर।
भैया मेरा हाथ थामे रहे और हम रोड पर बिना इधर-उधर देखे क्रिकेट सम्राट पढते रहे।
हम
बच्चों की रुचि आमतौर पर बल्लेबाजी में होती है लेकिन उस दिन से मेरी रूचि
गेंदबाजी में भी हो गयी। यह जिम लेकर के बाद एक नया रिकार्ड था जिसमें किसी भारतीय
गेंदबाज ने टेस्ट की एक पारी में 10 विकेट
लिए थे। कुंबले के बारे में हमें ये पता चल चुका था कि वे इंजीनियर भी हैं इससे
हमारी हिम्मत भी बढ गयी थी।
जैसे
ही कोई हमें सचिन के मैट्रिक फेल होने को लेकर हतोत्साहित करता हम तुरंत कुंबले को
ला पटकते। लेकिन कुंबले हमारे लिए असली वाला हीरो और प्रेरणा स्रोत तब बने जब
उन्होंने 2002 में वेस्टइंडीज के विरुद्ध एंटिगा में
जबड़ा टूट जाने के बाद भी 14
ओवर की गेंदबाजी की और ब्रायन लारा का
विकेट लिया। यह वही मैच था शायद जिसमें फरीदाबाद के अजय रात्रा ने किसी भी भारतीय
विकेटकीपर बल्लेबाज की तरफ से वेस्टइंडीज की धरती पर पहला टेस्ट शतक बनाया थ। ऐसे
फाइटर खिलाड़ी का कोच बनना भारतीय टीम के लिए सुखद है। एक मौका भी है कुंबले के
लिए ताकि वे साबित करें कि देशी कोच भी भारतीय टीम को ऊंचाई पर ले जा सकते हैं।
शुभकामनाएं।

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