04 February, 2012

राह कठिन है लक्ष्य नहीं ...........

अखिल भारतीय स्तर पर बिहार क्रिकेट निचले पायदान पर लटका हुआ है ,इस आशा में कि कभी हमें भी ऊपर आने का मौका मिलेगा |' सुखदेव नारायण ' 'रणधीर वर्मा ' 'कर्पूरी ' 'सद्भवना ' जैसे टूर्नामेंटों ने इसी आशा को जीवित रखते हुए बिहार के क्रिकेटरों को एक स्तरीय मंच दिया और खिलाडियों की एक नयी खेप पैदा की |


इस कड़ी में पिछले 6 सालों से सहरसा में आयोजित ' बाबु परमेश्वर कुवंर 20-20 क्रिकेट टूर्नामेंट ' अपने नयेपन और बेहतर संयोजन के कारण सर्वाधिक लोकप्रिय होता जा रहा है |इन सालों के दौरान बिहार ,बंगाल ,उत्तरप्रदेश,झारखण्ड इत्यादि राज्यों की अनेक टीमों ने यहाँ शिरकत की और खुले दिल से आयोजन की तारीफ की | टूर्नामेंट की व्यापकता का अंदाजा इस बात से लगता है कि पडोसी देश नेपाल कि टीम भी दूसरे साल इसमें भाग ले रही है | अतः अगर इसे अंतररास्ट्रीय टूर्नामेंट कहा जाय तो अतिशयोक्ति नहीं होगी |

इस तरह के आयोजन ने सहरसा क्रिकेट को भी एक नयी दिशा दी है | आंकड़े बताते हैं कि पिछले 5-6 सालों में सहरसा से लगभग एक दर्जन क्रिकेटरों ने बिहार का प्रतिनिधित्व किया |कई बार टीम बिहार की विजेता भी बनी और यहाँ के क्रिकेटरों ने बिहार कि कप्तानी भी की | ऐसा सौभग्य बिहार के पटना ,भागलपुर ,मुज्ज़फरपुर जैसे जिलों के अलावा शायद ही कहीं और जिले के क्रिकेटरों को नसीब होता रहा है |लेकिन सहरसा ने इस परंपरा को तोडा और खुद को एक क्रिकेट हब के तौर पर स्थापित किया | सहरसा बिहार के उन चुनिदा शहरों में से है जहाँ साल भर क्रिकेट की नेट प्रैक्टिस होती है |


इस परवर्तन और सफलता के लिए सबसे ज्यादा मेहनत की इस टुर्नामेन्ट के संस्थापक आयोजक तथा 'कोशी स्पोर्ट्स अकेडमी ' के संचालक रौशन सिंह 'धोनी ' ने | टूर्नामेंट को उस दिन दिन का जरुर इंतजार रहेगा जब यहाँ खेला कोई खिलाड़ी IPL या देश के लिए खेले | विश्वास कहता है कि यह मुकाम भी जल्द आ सकता है | लगातार बेहतर और सफल आयोजन के लिए हार्दिक बधाईयाँ.........................

No comments:

Post a Comment