23 December, 2012

तुम याद आओगे सचिन .........

पुलिसिया दमन के दुखद क्षणों के  बीच सचिन का एकदिनी से जाना भी मेरे लिये कम दुखद नहीं रहा | वैसे सचिन को राज्यसभा का सदस्य बनाने और  उनके सन्यास लेने के समय की जो परिस्थितियाँ देश में रही उस आधार पर इस फैसले के पीछे किसी खास समझौते से इंकार नहीं किया जा सकता | सचिन मूल रूप में एक खिलाड़ी रहा है और अगर हम उसको परखने में उसके खेल की और ध्यान लगायें तो इतना कह सकते है कि आने वाले समय में हम गर्व से कह सकेंगे कि हम सचिन को खेलते देख बड़े हुए हैं | गाँधी के बारे में जिस तरह कहा गया कि आने वाली पीढ़ी शायद ही विश्वास करे कि इस धरती पर हाड़ - मांस का कोई एक प्राणी हुआ था उसी तरह सचिन के बारे में जब कुछ कहा सुना जायेगा तो लोग आह भरेंगे |  प्रख्यात खेलनवीस प्रभाष जोशी ने 25 अगस्त 2002 को जनसत्ता में लिखा " किसी को अंतिम रूप से महान स्वीकार करने से पहले दुनिया उसे कीचड़ में लथेड़ने की पूरी कोशिश करती है | " सचिन के साथ आज दिन भर फसबुक पर ऐसा होता रहा तो क्या नया ? मैं सचिन के टेस्ट क्रिकेट से जाने कि उम्मीद तो जरुर लगा रहा था पर ODI से कतई नहीं | भाई उन्होंने अपनी पिछली दो  ODI पारियां विदेशी धरती पर खेलते हुए क्रमशः 114 और 52 रन बनाये | टेस्ट में मैं  गावस्कर , लारा ,पोंटिंग ,कैलिस ,द्रविड़ को सचिन से ऊपर मानता हूँ | वैसे आँकड़े मुझे ऐसा कहने कि इजाजत नहीं दे रहे पर मैं क्रिकेट के तमाम पहलुओं पर गौर करते हुए ऐसा कह रहा हूँ | इसी के बरक्स मुझे ऐसा कोई खिलाड़ी नजर नहीं आता जो एक दिनी में सचिन से कंधा जुड़ा सके | इस पोस्ट को लिखते हुए मुझे तमाम वो घटनाएँ याद आ रही है जिसको मैंने  पत्रिकाओं और समाचार पत्रों से काट कर डायरी में चिपकाये टुकडों में प्रतियोगिता परीक्षा के माफिक सैकडों बार पढ़ा है | सचिन जैसा अपने कर्म के प्रति समर्पित योद्धा सदियों में कम पैदा होता है | आज जब युवा पीढ़ी चकाचौंध के बीच अपने मूल्यों के फिसल रही है क्या वहाँ  सचिन को उदाहरण के तौर पेश नहीं किया जा सकता | खेल की दुनिया में एक से एक महान खिलाड़ी हुए ,खूब प्रसिद्धि भी पायी पर कम लोग उसे  सचिन के तरह पचा पाए | मैं सचिन को भगवान तो नहीं मानता पर  अंत में इतना इतना जरुर कहूँगा कि सचिन भी  जादूगर थे ध्यानचंद ,पेले की तरह |

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